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दिन-रात तृष्णाएँ बस आने चाय पाता ही क्या है रहकरपचासबरससाथहमसमझनसकेउसे।निकलाइतनाखुदगर्जहँसतेहँसतेदर्दपीगया। पीते हैं सफ़र राजनैतिक पार्टियों के अंधभक्त दृष्टिकोण उनका इश्क़ कभी बस मराठीअसेआमुचीमायबोली आमने-सामने न्यूइयर कभी रेलगाड़ी में नया साल भटकते रहते संगसाथछूँटेनहीं एक कप

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